Mrf success story । Mrf tyre success story in Hindi 2021

मद्रास रबर फैक्ट्री की सफलता की कहानी । Success Story of Madras rubber Factory


Met company success story



सफलता किसी को असानी से नहीं मिलती है इसके लिए कड़ी मेहनत और लगन की जरूरत होती है, हर व्यक्ति को सफलता और असफलता का सामना करना पड़ता है। इसलिए असफलता से डरना नहीं चाहिए बल्कि डटकर उनका सामना करना चाहिए।अगर हौसला हो तो इंसान कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।

आज हम बात करेंगे भारत की एक ऐसी कंपनी के बारे में जो कभी सड़को पर गुब्बारे बेचते थे, पर अब यह हैं भारत की सबसे बड़ी टायर कंपनी हैं।

हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे बड़ी टायर कंपनी MRF   के बारे में जिसका पूरा नाम Madras Rubber Factory हैं। इस कंपनी की शुरुआत सन 1946 में एक गुब्बारे बनाने वाली कंपनी के तौर पर हुई थी इस कंपनी को शुरू करने वाले के. एम. मैमन मापिल्लई थे। के.एम. के पिता का नाम केसी मैमन मापिल्लई था। जो कि एक सफल कारोबारी थे , बताया जाता है कि त्रावणकोर के राजा ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने की वजह से उनके पिता केसी मैमन मापिल्लई की सारी प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया था। ऐसे में उनके सभी धंधे ठप हो गए थे।

इसके बाद एक अच्छा हँसता खेलता परिवार गरीबी की स्थिति में आ गया। मापिल्लई के पास सिर ढकने की भी जगह नहीं बची थी। यहाँ तक की कई बार उन्हें कॉलेज के फर्श पर सोना पड़ा। इसके बाद मापिल्लई अपनी धर्मपत्नी के साथ एक झोपड़ी में रहने लगे। इसके बाद इन्होंने गुब्बारा बनाने की फैक्ट्री शुरू की । और इस फैक्ट्री का नाम रखा मद्रास रबर फैक्ट्री । इस फैक्ट्री में वह स्वयं ही गुब्बारे बनाते थे और फिर इन्हें बेचने के लिए बाजार जाया करते थे।


इसके बाद मेनन ने बच्चों के खिलौने आदि बनाकर बेचे। और इसके बाद मेनन ने धीरे-धीरे रबड़ से बने उत्पादों की बिक्री करने लगे। फिर उन्होने अपना पहला ऑफिस थाम्बू चीटे स्ट्रीट 【 Thambu Chetty Street, Madras (now Chennai)】, मद्रास में खोला था। 



कुछ साल यह करने के बाद माप्पिलाई को एहसास होता है कि अब कुछ और कदम बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए उन्होंने अपने चचेरे भाई से मदद लेने की सोची। उनके चचेरे भाई का टायर पर रबर चढ़ाने का प्लांट था । इस प्लांट में इस्तेमाल होने वाली रबर को वह विदेश से मँगवाते थे । करीब 2-3 साल बाद माप्पिलाई ने अपने चचरे भाई की मदद से उन्होंने ट्रीड रबर ( tread rubber ) बनाना शुरू कर दिया ।

इसके बाद भी माप्पिलाई जी का मन नहीं भरा। इनके द्वारा बनाई जा रही रबर (tread rubber ) लोगो को बहुत ही पसंद आ रही थी। इसके बाद और क्या होना था , MRF ने दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की की। इसके बाद मद्रास रबर फैक्ट्री रबर बाजार का किंग बन गया। समय बीतते देर नही लगी , और 1956 तक MRF के पास भारत में ट्रीड रबर (tread rubber) की 50% की हिस्सेदारी थी।

इसके बाद माप्पिलाई ने सोचा कि अब व्यापार को और बढ़ाया जाए। यह वह समय था जब भारत में सिर्फ वेदेशी कंपनियों का एक तरफा राज़ था। सन 1961 में एमआरएफ ने मैन्सफील्ड टायर एंड रबर कंपनी के साथ टाई-उप करके टायर बनाना शुरू किया। 


इसके बाद 1964 में ही व्यापार बढ़ाने के लिए MRF ने बैरुत में अपना पहला ओवरसीज ऑफिस खोला। इसी साल में इसका मसल्समैन वाला logo तैयार हुआ। कुछ समय बाद एमआरएफ ने टायर का एक्सपोर्ट अमेरिका को शुरू किया। इसके बाद सन 1973 में देश का पहला रेडियल टायर पेश किया। 

1967 में एफआरएफ अमेरिका को एक्सपोर्ट करने वाली पहली कंपनी बन गई, तो वहीं 1973 में कंपनी ने देश में पहली बार नायलान टायर लॉन्च किया। साल 1979 तक कंपनी का नाम विदेश में फैल चुका था, लेकिन इसी साल अमेरिकी कंपनी मैंसफील्ड ने एफआरएफ से अपनी हिस्सेदारी खत्म कर ली। इसके बाद कंपनी का नाम एमआरएफ लिमिटेड हो गया। इसके बाद मैपिल्लई ने छोटी-बड़ी कई कंपनियों के साथ टाईअप कर कंपनी को एक नए मुकाम पर पहुंचाया। साल 2003 में 80 साल की उम्र में मैपिल्लई का निधन हो गया था। लेकिन मैपिल्लई तब तक कंपनी को टायर के फील्ड में नंबर वन बना चुके थे।


मैपिल्लई के निधन के बाद उनके बेटों ने बिजनेस की कमान संभाली और कंपनी लगातार ग्रोथ करती रही।यह मेमन की हिम्मत और उनके बेटों की काबिलियत ही है कि आज MRF 34 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी है। इसके एक शेयर की कीमत 80,100 रुपए है, जो भारत में सबसे ज्यादा है।एनएसई पर दी गई जानकारी के मुताबिक, सन 1993 में एमआरएफ का शेयर महज 11 रुपये का था।

 क्या आपको पता है भारत से सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ी मारुति 800 में भी MRF का टायर ही इस्तेमाल हुआ था। MRF बनाती है लड़ाकू विमान सुखोई के टायर
कंपनी आज ट्यूब, बेल्ट, ट्रेड, हवाईजहाज तक के टायर बनाती है। एमआरएफ भारत की एकमात्र टायर निर्माता कंपनी है जो सुखोई 30 एमकेआई सिरीज के लड़ाकू विमानों के लिए टायर बनाती है। दुनिया के करीब 65 देशों को प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए जाते हैं।


के.एम. माप्पिलाई को दक्षिण भारत का धीरूभाई अंबानी कहा जाता हैं। 


Post a Comment

0 Comments