1200 साल पुराने इस मन्दिर के मुख्य मूर्ति पर कैसे पड़ती थी दिन भर सूर्य की रोशनी। Spectacular Temple Of Kashmir : Martand Surya Mandir.

Martand Surya Mandir - मार्तंड सूर्य मंदिर 


मार्तंड सूर्य मंदिर कश्मीर


भारत में 4 मुख्य सूर्य मन्दिर है । 
1. मार्तंड मंदिर ( कश्मीर )
2. कोणार्क सूर्य मंदिर ( उड़ीसा )
3. मोढेरा सूर्य मंदिर ( गुजरात के मेहसाणा  )
4. झालरापाटन का सूर्य मंदिर ( राजस्थान )

 
मार्तण्ड सूर्य मंदिर कहाँ पर स्थित है ? 
कश्मीर पर कई हिन्दू राजाओं का शासन रहा है। इन हिन्दू साम्राज्यों की कई निशानियाँ आज भी कश्मीर में मौजूद है।
 कश्मीर के दक्षिणी भाग में अनंतनाग से पहगाम के रास्ते में मार्तण्ड नामक स्थान पर सूर्यदेव का एक मंदिर स्थित है जिसका नाम मार्तंड मंदिर है। भारत में मौजूद चारों सूर्य मन्दिरों में से मार्तण्ड सूर्य मन्दिर सबसे पुराना और सबसे बड़ा सूर्य मन्दिर है। सबसे बड़ा होने के साथ साथ इस मंदिर की जो कारीगरी है वो पूरे कश्मीर में कहीं देखने को नहीं मिलती है। 

Martand Surya Mandir -
Image Source : Jagran

मार्तण्ड सूर्य मंदिर किसने बनवाया ?
सूर्य देव को समर्पित इस मंदिर की स्थापना 8 वीं शताब्दी में कारकोटा राजवंश राजा ललितादित्य मुक्तिपीड ने की थी। राजा ललितादित्य कश्मीर के सबसे सफल और प्रसिद्ध राजा थें। जिन्होंने  तिब्बत से लेकर द्वारिका तक, उड़ीसा के सागर तट से दक्षिण तक, पूर्व में बंगाल, पश्चिम में विदिशा और मध्य एशिया तक अपने राज्य का परचम फहराया था। उसकी सेना की धमक ईरान तक जा पहुंची थी। इस वीर राजा ने पीकिंग यानि वर्तमान चीन तक को जीत लिया था। लेकिन वामपंथी इतिहासकारों ने ऐसे महान राजाओं के इतिहास को जान बूझकर छिपा दिया। इस सूर्य मन्दिर की एक और खासियत है इसके निर्माण में किया जाने वाले पत्थर। कहा जाता है कि इस मन्दिर को बनाने के लिए बड़े बड़े पत्थर इस मंदिर के पास से गुजरने वाले नदी के सहारे यहाँ लाये गए थे।


कहा जाता था कि इस मन्दिर के ऐसा यन्त्र लग था जिससे दिन भर गर्भगृह में रखे सूर्यदेव की मूर्ति पर सूर्य की रोशनी पड़ती रहती थी। ये मन्दिर अपने आप में ही विशेष था। इसकी कई विशेषताओं में से एक विशेषता ये भी थी कि इस मन्दिर के चारों तरफ 365 मूर्तियाँ तराशी गयी थीं। मतलब साल के प्रत्येक दिन के लिए एक मूर्ति। 

मार्तण्ड मन्दिर से 190 किमी दूर बसा है परिहासपुर जो राजा ललितादित्य का साम्राज्य का हिस्सा था। परिहासपुर यानी हँसता हुआ शहर। परिहासपुर को आम स्थानीय भाषा में अब परसपुर कहा जाता है ।
 इस परिहासपुर में भी राजा ललितादित्य ने एक शानदार विष्णु मन्दिर की स्थापना की थी । इस मन्दिर में कई मूर्तियाँ थीं जो सोने व चाँदी कि बनी हुई थी। और इस मन्दिर की मुख्य मूर्ति 84,000 तोले सोने से बनी हुई थी।

 इस मन्दिर के निर्माण में भी सोना और चांदी का इस्तेमाल किया गया था। कहते हैं कि ये मन्दिर इतना शानदार था कि इसे देखने के लिए लोग पूरे भारत से यहाँ आते थे। लेकिन यही सोना और चाँदी इसके तबाह होने के कारण भी बना। आज यहाँ इस मन्दिर के खँडहर ही देखने को मिलते हैं ।


मार्तण्ड मन्दिर पर भी कई हमले हुए और इस पर सबसे आखिरी हमला किया था सिकन्दर ने। कहते हैं कि वो और उसके साथियों ने पूरे एक साल तक यहाँ रुक कर इसे तोड़ने की कोशिश की लेकिन ये मन्दिर पूरी तरह से नहीं टूटा। तो तंग आकर उसने यहाँ आग लगा दी और वो यहाँ से चला गया। 

मन्दिर कई महीनों तक जलता रहा लेकिन फिर भी पुरी तरह से बर्बाद नहीं हुआ। इस बात से यह पता चलता है कि ये मन्दिर कितना भव्य और मजबूत रहा होगा। आज 1200 साल बाद भी कुछ हिस्सें ही सही, लेकिन ये मन्दिर आज भी शान से खड़ा है। दुःख की बात है कि आज ज्यादातर भारतीयों को कश्मीर में बसे इस मन्दिर के बारे में और राजा ललितादित्य मुक्तिपीड के बारे में जानकारी नही है।

मार्तण्ड सूर्य मंदिर का आंगन 220 फुट x 142 फुट है। यह मंदिर 60 फुट लम्बा और 38 फुट चौड़ा था। इसके चतुर्दिक लगभग 80 प्रकोष्ठों के अवशेष वर्तमान में हैं। इस मंदिर के पूर्वी किनारे पर मुख्य प्रवेश द्वार का मंडप है। इसके द्वारों पर त्रिपार्श्वित चाप (मेहराब) थे, जो इस मंदिर की वास्तुकला की विशेषता है।

Post a comment

0 Comments